जहाँ मैं खड़ा हूँ

रामदरश मिश्र की काव्य रचनाएँ

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रामदरश मिश्र

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जहाँ मैं खड़ा हूँ

Description

अपनी ओर से

 

'जहां मैं खड़ा हूं' यों तो मेरी जीवन-यात्रा का वृत्तांत है किंतु वास्तव में यह उस परिवेश का वृत्तांत है जहां मेरे जीवन और साहित्य की चेतना, अनुभव और मूल्य-बोध निर्मित हुए। मैं एक सामान्य व्यक्ति हूं। मेरे जीवन में ऐसा कुछ नहीं है जो पाठकों को महान्, असामान्य और बहुत मूल्यवान् लगे इसलिए मात्र अपनी कहानी कहना दंभ ही होता लेकिन मैंने जिस परिवेश की कहानी कही है और परिवेश के साथ व्यक्ति के जिन संबंधों की कथा कही है वे निश्चित ही मूल्यवान् हैं और सामान्य व्यक्ति के भी दुःख-दर्द अपनी जगह कम सार्थक नहीं होते हैं। हो सकता है मेरे दुःख-दर्द बहुतों के दुःख-दर्द से जुड़ते प्रतीत हों ।

 

कुछ वर्ष पहले अपने साहित्य के कुछ प्रेमियों के आग्रह पर मैंने 'जहां मैं खड़ा हूं' निबंध लिखा था जो मेरे निबंध संग्रह 'कितने बजे हैं ?' में संगृहीत है। इस निबंध में मैंने संक्षेप में अपने प्रारंभिक जीवन के तथ्यों और अनुभवों को तथा परिवेश के विविध प्रसंगों और रूपों को समेटने की चेष्टा की है। अब जब मैंने विस्तार से उन्हें चित्रित करने का प्रयास किया तो स्वाभाविक है कि पहले निबंध में सार रूप में आये कुछ प्रसंग और अनुभव आगे के निबंधों में विस्तार से चित्रित हों और थोड़ा-बहुत पिष्टपेषण भी हो जाय ।

 

अपने माध्यम से, अपने जीवन से जुड़े विविध परिवेशों की कथा चार खंडों में लिखी है। प्रस्तुत पुस्तक पहला खंड है।

 

- रामदरश मिश्र