ट्रस्टी और प्रबंधन

हमारी प्रबंधन टीम

Trustee 1

श्री शशांक मिश्र (अध्यक्ष)

(पद्मश्री रामदरश मिश्र के मँझले पुत्र) 17 अगस्त 1958 को जन्मे श्री शशांक मिश्र का व्यक्तित्व अनुशासन और प्रबंधन का अनूठा संगम है। दिल्ली के प्रतिष्ठित सिविल लाइन्स स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा और दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद, उन्होंने अपने पेशेवर सफर की शुरुआत 'भारतीय सांख्यिकी संस्थान' (ISI), दिल्ली जैसे बौद्धिक संस्थान से की। इसके पश्चात, उन्होंने 'भारतीय स्टेट बैंक' (SBI) में अपनी सेवाएँ दीं, जहाँ से वे एक सुदीर्घ और सफल कार्यकाल के बाद ससम्मान सेवानिवृत्त हुए। शशांक जी न केवल कॉर्पोरेट जगत में कुशल रहे हैं, बल्कि खेल के मैदान में भी उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता को सिद्ध किया है; उन्होंने बास्केटबॉल की अनेक राष्ट्रीय व संस्थानिक प्रतियोगिताओं में स्टेट बैंक का गौरवपूर्ण प्रतिनिधित्व किया। वर्तमान में, वे अपने पिता की साहित्यिक विरासत को अक्षुण्ण रखने के लिए 'रामदरश मिश्र न्यास' का संचालन पूर्ण निष्ठा, प्रशासनिक दक्षता और सेवा भाव के साथ कर रहे हैं।

Trustee 1

डॉ. ओम निश्चल (उपाध्यक्ष)

(सुप्रसिद्ध कवि, विवेचक, निबंधकार एवं भाषाविद) 15 दिसंबर, 1958 को हर्षपुर, प्रतापगढ़ (उ.प्र.) में जन्मे डॉ. ओम निश्चल समकालीन हिंदी आलोचना और कविता के शिखर स्तंभों में से एक हैं। अवध और लखनऊ विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा (M.A., Ph.D.) प्राप्त डॉ. निश्चल ने 'साठोत्तर हिंदी कविता' पर मौलिक शोध किया है। 'इलाहाबाद बैंक' में वरिष्ठ राजभाषा प्रबंधक के पद पर 34 वर्षों की उत्कृष्ट सेवा के बाद, वे अब पूर्णतः साहित्य साधना में लीन हैं। उनकी मेधा का प्रमाण उनकी प्रकाशित एवं संपादित 75 पुस्तकें हैं, जो कविता, गज़ल, आलोचना और बाल साहित्य तक फैली हैं। वे 'भारतीय ज्ञानपीठ' और 'हिंदी अकादमी, दिल्ली' जैसी शीर्ष संस्थाओं में सलाहकार व सदस्य रहे हैं। संप्रति, वे 'भारतीय शिक्षा बोर्ड' के सलाहकार संपादक हैं। मिश्र जी के जीवन और साहित्य पर उनका कार्य न्यास के लिए एक अकादमिक धरोहर है।

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प्रो. स्मिता मिश्र (सचिव)

(पद्मश्री रामदरश मिश्र की सुपुत्री एवं न्यास सदस्य सचिव) 21 जुलाई 1966 को जन्मी प्रो. स्मिता मिश्र हिंदी साहित्य, मीडिया और अकादमिक जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के एस.जी.टी.बी. खालसा कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत डॉ. मिश्र ने साहित्य को आधुनिक संचार माध्यमों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्हें भारत सरकार द्वारा 'भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है और खेल पत्रकारिता में उनके अद्वितीय योगदान के लिए उनका नाम 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में दर्ज है। 'रामदरश मिश्र रचनावली' के 14 खंडों का संपादन उनकी संपादन कला और पितृ-साहित्य के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। अंतरराष्ट्रीय सार्क पत्रकार फोरम (SJF) की कार्यकारी सदस्य के रूप में वे हिंदी और भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंचों पर प्रतिनिधित्व प्रदान कर रही हैं।

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डॉ. किरण पाल सिंह (कोषाध्यक्ष)

(विधि, वित्त एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ) डॉ. किरण पाल सिंह एक ऐसे आधुनिक विचारक हैं जो कानून, वित्त और तकनीक के जटिल समन्वय को समझते हैं। 16 वर्षों के पेशेवर अनुभव में उन्होंने एक अग्रणी कंपनी के एम.डी. और सह-संस्थापक के रूप में कॉर्पोरेट रणनीति को धरातल पर उतारा है। 'डिजिटल करेंसी और वित्तीय साइबर अपराध' में उनकी पी-एच.डी. उन्हें वर्तमान समय के ज्वलंत विषयों का विशेषज्ञ बनाती है। उनके शोध पत्र Scopus और ABDC जैसे अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स की शोभा बढ़ाते हैं। न्यास के कोषाध्यक्ष के रूप में, वे यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि मिश्र जी की 'ग्राम-चेतना' और 'मिट्टी की सुगंध' को अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक (जैसे AI और Blockchain) के माध्यम से भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित किया जाए। उनका लक्ष्य तकनीकी साक्षरता को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है।

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श्री भँवरलाल गुर्जर (न्यासी)

1 जून 1941 को अहमदाबाद में जन्मे अहमदाबाद श्री भँवरलाल गुर्जर पद्मश्री रामदरश मिश्र जी के अत्यंत प्रिय शिष्यों में से एक रहे हैं। अहमदाबाद के सेंट जेवियर्स कॉलेज से बी.ए. और एम.ए. की शिक्षा के दौरान उन्हें मिश्र जी का सान्निध्य गुरु के रूप में प्राप्त हुआ। गुर्जर जी ने गुजरात के मानसा स्थित एस.डी. एंड बी.आर. कॉमर्स कॉलेज में हिंदी का अध्यापन किया और वहीं से प्राध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुए। वे हेमचंद्राचार्य उत्तर गुजरात विश्वविद्यालय में हिंदी अध्ययन मंडल के अध्यक्ष तथा गुजरात विश्वविद्यालय में बोर्ड ऑफ स्टडीज़ के सदस्य भी रहे। हिंदी एवं गुजराती साहित्य पर आपका विशेष अधिकार है। आपके काव्य-संग्रह ‘पथरीली जमीन’ का विमोचन स्वयं रामदरश मिश्र जी के कर-कमलों से हुआ। भारत-विभाजन और हिंदी कथा-साहित्य आपके अध्ययन-शोध का प्रमुख क्षेत्र रहा है। वर्तमान में आप सपरिवार गांधीनगर, गुजरात में सेवानिवृत्त जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

Trustee 6

श्री अश्विनी कुमार तिवारी (न्यासी)

(साहित्य और गणित के मध्य सेतु) श्री अश्विनी कुमार तिवारी (रामदरश मिश्र की ज्येष्ठ पुत्री डॉ. अंजलि तिवारी के जीवनसंगी) का व्यक्तित्व तर्क और संवेदना का अद्भुत संतुलन है। 2 मई 1953 को कानपुर में जन्मे श्री तिवारी ने गणित और 'ऑपरेशन्स रिसर्च' में विशेषज्ञता प्राप्त की, जिसने उन्हें एक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण प्रदान किया। तीन दशकों से अधिक समय तक आईटी (IT) क्षेत्र के शीर्ष पदों पर रहते हुए उन्होंने 'ET&T Corporation' में उप-महाप्रबंधक और कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों में वाइस प्रेसीडेंट व सीईओ के रूप में वैश्विक नेतृत्व किया। सेवानिवृत्ति के पश्चात, वे अपनी इस प्रबंधकीय दूरदर्शिता का उपयोग न्यास के कार्यों को व्यवस्थित करने में कर रहे हैं। 'जल टूटता हुआ' जैसे उपन्यासों के प्रति उनका लगाव उनके भीतर छिपे उस गहरे साहित्य-प्रेमी को दर्शाता है जो संख्याओं के बीच भी कविता ढूँढ लेता है।

Trustee 6

डॉ. वेद मित्र शुक्ल (न्यासी)

(अनुवादक, आलोचक एवं एसोसिएट प्रोफेसर) 2 नवम्बर 1980 को जन्मे डॉ. वेद मित्र शुक्ल हिंदी और अंग्रेजी साहित्य के बीच एक सांस्कृतिक राजदूत की भूमिका निभाते हैं। जे.एन.यू. (JNU) से पी-एच.डी. प्राप्त डॉ. शुक्ल वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज में अंग्रेजी के एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उन्होंने मिश्र जी के साहित्य का अंग्रेजी में अनुवाद कर उन्हें वैश्विक पाठकों तक पहुँचाया है, जिसमें रामदरश मिश्र: सेलेक्टेड पोइट्री' विशेष उल्लेखनीय है। उनकी अपनी मौलिक कृतियाँ 'उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान' और 'हिंदी अकादमी' द्वारा पुरस्कृत हैं। साहित्य के साथ-साथ संगीत (वंशी एवं तबला वादन) में उनकी गहरी पैठ न्यास के सांस्कृतिक आयोजनों को नई ऊर्जा देती है। वे 'केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के सदस्य के रूप में भी राष्ट्र की सांस्कृतिक नीति में योगदान दे रहे हैं।

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डॉ. सन्नी कुमार गोंड (न्यासी)

(मीडिया शोधार्थी एवं सहायक प्रोफेसर) डॉ. सन्नी कुमार गोंड वर्तमान में 'विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज़' (VIPS) में सहायक प्रोफेसर के रूप में नई पीढ़ी के पत्रकारों को गढ़ रहे हैं। अपने करियर की शुरुआत 'जनसत्ता' जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्र से करने के कारण उनकी पकड़ ज़मीनी हकीकत और समकालीन विमर्श पर बहुत मजबूत है। दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न शोध प्रोजेक्ट्स, विशेषकर महिला खेल और टीम प्रायोजन पर उनके कार्यों ने अकादमिक जगत में नई राहें खोली हैं। उनके शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहे गए हैं। न्यास में वे आधुनिक शोध पद्धतियों और युवा संचार माध्यमों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य कर रहे हैं।

Trustee 6

श्री केशव मोहन पाण्डेय (न्यासी)

(बहुभाषी सर्जक एवं सांस्कृतिक समन्वयक) 18 अप्रैल 1975 को कुशीनगर की ऐतिहासिक धरती पर जन्मे केशव मोहन पाण्डेय का संपूर्ण जीवन भाषा और कला की सेवा में समर्पित है। हिंदी और भोजपुरी के सशक्त हस्ताक्षर के रूप में आपकी एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। आप 'सर्व भाषा ट्रस्ट' के समन्वयक और 'सर्वभाषा' पत्रिका के प्रधान संपादक के रूप में विभिन्न भारतीय भाषाओं को जोड़ने का महान कार्य कर रहे हैं। पटकथा लेखन, नाट्य निर्देशन और अनुवाद (डोगरी से भोजपुरी) में आपकी दक्षता बहुआयामी है। दो दर्जन से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित केशव जी न्यास के जन-संवाद और भाषाई विस्तार की योजनाओं के मुख्य वास्तुकार हैं।

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श्री रवि शंकर सिंह (सोशल मीडिया प्रभारी)

(युवा रचनाकार एवं डिजिटल प्रबंधक) 19 फरवरी 1997 को जन्मे रवि शंकर सिंह न्यास के युवा और ऊर्जावान सोशल मीडिया प्रभारी हैं। एस.जी.टी.बी. खालसा कॉलेज (डी.यू.) से स्नातक और इग्नू से परास्नातक रवि, शोध और रचनात्मक लेखन में निरंतर सक्रिय हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनके शोध पत्र और कविताएँ उनकी बौद्धिक गहराई को दर्शाती हैं। न्यास के 'सोशल मीडिया प्रभारी' के रूप में वे मिश्र जी के विचारों और न्यास की गतिविधियों को डिजिटल युग की भाषा में जन-जन तक पहुँचाने का तकनीकी दायित्व संभाल रहे हैं।